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है धड़कन मेरी बेटी भी – राखी कुलश्रेष्ठ

है धड़कन मेरी बेटी भी, सांसों का बेटा है संगम।
दोनों ही हैं घर के सितारे ,है संसार में उनका दमखम।।

है दो घर सम्बल बेटी भी, तो बेटा घर को है संभाले।
झूठे आडम्बर में रहकर,तुमने भेदभाव खुद पाले।
बेटी भी गर बनी चतुर्भुज, तो बेटा भी कोण बना सम।।
दोनों ही घर…..

बेटी भी कहीं बहू है बनती,जब बेटे से बन्धन जुड़ते ।
दोनों ही एक दूजे के पूरक , दिल की धड़कन मन भी मिलते ।
फेरों के नियमों के संग चल,वचन भरें जब दोनों हमदम।।
दोनों ही घर…..

अगर जमाई रूप है बेटा,बहू रूप में बेटी स्वीकारें।
दोनों घर के नींव व आले,हर रिश्तों के वो उजियारे।
अंतर भी मिट जाएगा जब, दोनों घर बन जाओ मरहम।।
दोनों ही घर….

यही रीत निष्कर्ष यही है , उज्जवल बेटी तो बेटा हल।
वसुधा के दोनों ही जीवन, बेटी बेटा दोनों ही हैं कल।
वर्तमान में सोच को बदलो, दोनों ही हैं देश के परचम।।
दोनों ही घर…

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