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वसंत – केशव शरण

वसंत
दहकी जो आग
सेमल और गुलमोहर के पेड़ों में
पिघले भू-भाग
हिमालय के
बौर उठे आम के बाग़
सर्दी-गर्मी के मेल से
और गूंजा पंचम राग
जो कोयल का
फिर तो गये जाग
हमारे भी अरमान
और प्यार की मांग
प्राण करने लगे
केशव शरण
वाराणसी
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